Chandrashekhar Vashistha

वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं, पौराणिक ग्रंथों मान्यताओ के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं,उनका अक्षय फल मिलता है,इसे अत्यंत स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता हे

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की यह  तिथि अत्यंत स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी….

Read more

अष्ट चिरंजीवी

सनातन हिंदू संस्कृति के इतिहास और पुराण अनुसार ऐसे आठ महामानव या देवता हैं, जो चिरंजीवी हैं। यह सब किसी न किसी वचन, नियम या शाप से बंधे हुए हैं और यह सभी दिव्य शक्तियों से संपन्न है। योग में जिन अष्ट सिद्धियों की बात कही गई है वे सारी शक्तियाँ इनमें विद्यमान है। यह परामनोविज्ञान जैसा है, जो परामनोविज्ञान और टेलीपैथी विद्या जैसी आज के आधुनिक साइंस की विद्या को जानते हैं वही इस पर विश्वास कर सकते हैं।  अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनूमांश्च विभीषण:।कृप: परशुरामश्च सप्तएतै चिरजीविन:॥सप्तैतान् संस्मरेन्नित्यं मार्कण्डेयमथाष्टमम्।जीवेद्वर्षशतं सोपि सर्वव्याधिविवर्जित।।अर्थात इन आठ लोगों (अश्वथामा, दैत्यराज बलि, वेद व्यास, हनुमान,….

Read more

शिव ही प्रकृति हे, प्रकृति ही शिव, वह ही लय प्रलय हे, वही आदि सृजन और अनंत हे, वह रूद्र महादेव महेश हे,अमरनाथ केदारेश्वर विश्वनाथ सोमनाथ हे, केलाश मैकाल और ओंकार भी वही हे, वह ही कालो का भी काल, महाकाल हे!

भगवान शिव वन्दे देव उमापतिम सुरगुरुं वन्दे जगत् कारणं,वन्दे पन्नग भूषणं मृग्धरम वन्दे पशूनाम्पतिम ! वन्दे सूर्य शशांक वहिनयनम वन्दे मुकुंदप्रियम,वन्दे भक्त जनाश्रयम च वरदम वन्दे शिवम् शंकरं !! शिव अर्थात शुभ और कल्याणकारी , तन्मे मनः शिव संकल्पमस्तु अर्थात हमारा मन शुभ और कल्याणकारी संकल्पों से युक्त हो कि प्रार्थना शास्त्र करता हे, भवानि शङ्करौ वन्दे श्रध्दा विश्वास रूपिणौ | याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम् || ‘भवानीशंकरौ वंदे’ भवानी और शंकर की हम वंदना करते है। ‘श्रद्धा विश्वास रूपिणौ’ अर्थात श्रद्धा का नाम पार्वती और विश्वास का शंकर। श्रद्धा और विश्वास- का प्रतीक विग्रह मूर्ति हम मंदिरों में….

Read more

शुभ् हनुमान् जन्मोत्सव, मनोजवं मारूततुल्य वेगं, जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं, वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपध्दे:

शुभ् हनुमान् जयंती जन्मोत्सव ??????? श्री हनुमान मूल मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ || मनोजवं मारूततुल्य वेगं, जितेंद्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं, वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपध्दे: || ??????? द्वादशाक्षर हनुमान मंत्र: हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्। फल: से इस मंत्र के बारे शास्त्रो में वर्णित हैं की यह मंत्र स्वतंत शिवजी ने श्रीकृष्ण को बताया और श्रीकृष्ण नें यह मंत्र अर्जुन को सिद्ध करवाया था जिसे अर्जुन ने चर-अचर जगत् को जीत लिया था। प्रेत बाधा दूर करे चमत्कारी हनुमान मंत्र:= हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार हनुमानजी का नाम लेने से भूत-प्रेत आदि सभी बाधाएं दूर हो….

Read more

यज्ञ, योग की विधि है जो परमात्मा द्वारा ही हृदय में सम्पन्न होती है। जीव के अपने सत्य परिचय जो परमात्मा का अभिन्न ज्ञान और अनुभव है, यज्ञ की पूर्णता है

यज्ञ, योग की विधि है जो परमात्मा द्वारा ही हृदय में सम्पन्न होती है। जीव के अपने सत्य परिचय जो परमात्मा का अभिन्न ज्ञान और अनुभव है, यज्ञ की पूर्णता है। यह शुद्ध होने की क्रिया है। इसका संबंध अग्नि से प्रतीक रूप में किया जाता है। यज्ञ का अर्थ जबकि योग है किन्तु इसकी शिक्षा व्यवस्था में अग्नि और घी के प्रतीकात्मक प्रयोग में पारंपरिक रूचि का कारण अग्नि के भोजन बनाने में, या आयुर्वेद और औषधीय विज्ञान द्वारा वायु शोधन इस अग्नि से होने वाले धुओं के गुण को यज्ञ समझ इस ‘यज्ञ’ शब्द के प्रचार प्रसार में….

Read more

महाकाल स्त्रोतम

ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पत महाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुते महाकाल महादेव महाकाल महा प्रभो महाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुते महाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहन महाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुते भवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमः रुद्राय च नमस्तुभ्यं पशुना पतये नमः उग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै नमः भीमाय च नमस्तुभ्यं मिशानाया नमो नमः ईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमः सघोजात नमस्तुभ्यं शुक्ल वर्ण नमो नमः अधः काल अग्नि रुद्राय रूद्र रूप आय वै नमः स्थितुपति लयानाम च हेतु रूपआय वै नमः परमेश्वर रूप स्तवं नील कंठ नमोस्तुते पवनाय नमतुभ्यम हुताशन नमोस्तुते सोम रूप नमस्तुभ्यं सूर्य रूप नमोस्तुते यजमान नमस्तुभ्यं अकाशाया नमो नमः सर्व….

Read more

धर्म

धर्म भारतीय संस्कृति और दर्शन की प्रमुख संकल्पना है। ‘धर्म’ धब्द का पश्चिमी भाषाओं में कोई तुल्य शब्द पाना बहुत कठिन है। साधारण शब्दों में धर्म के बहुत से अर्थ हैं जिनमें से कुछ ये हैं – कर्तव्य, अहिंसा, न्याय, सदाचरण, सद्गुण आदि। धर्म संस्कृत भाषा का शब्द हैं जोकि धारण करने वाली धृ धातु से बना हैं। “धार्यते इति धर्म:” अर्थात जो धारण किया जाये वह धर्म हैं। अथवा लोक परलोक के सुखों की सिद्धि के हेतु सार्वजानिक पवित्र गुणों और कर्मों का धारण व सेवन करना धर्म हैं। दूसरे शब्दों में यह भी कह सकते हैं की मनुष्य….

Read more

स्वस्तिक मंत्र या स्वस्ति मन्त्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो। 

पुरातन वैदिक सनातन संस्कृति का परम मंगलकारी प्रतीक चिह्न ‘स्वस्तिक’ अपने आप में विलक्षण है। यह देवताओं की शक्ति और मनुष्य की मंगलमय कामनाएँ इन दोनों के संयुक्त सामर्थ्य का प्रतीक है। स्वस्तिक का अर्थ सामान्यतय: स्वस्तिक शब्द को “सु” एवं “अस्ति” का मिश्रण योग माना जाता है। यहाँ “सु” का अर्थ है- ‘शुभ’ और “अस्ति” का ‘होना’। संस्कृत व्याकरण के अनुसार “सु” एवं “अस्ति” को जब संयुक्त किया जाता है तो जो नया शब्द बनता है- वो है “स्वस्ति” अर्थात “शुभ हो”, “कल्याण हो”। स्वस्ति मंत्र ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्ध-श्रवा-हा स्वस्ति न-ह पूषा विश्व-वेदा-हा । स्वस्ति न-ह ताक्षर्‌यो अरिष्ट-नेमि-हि स्वस्ति नो बृहस्पति-हि-दधातु ॥ अन्य जानकारी भारतीय….

Read more

भारतीय संसकृति में सर्वाधिक महत्ता है शांति पाठ मन्त्र की

शान्ति मन्त्र वेदों के वे मंत्र हैं जो शान्ति की प्रार्थना करते हैं। प्राय: सनातन  धर्म   हिन्दुओं के  धार्मिक कृत्यों के आरम्भ और अन्त और् महत्व पल  इनका पाठ किया जाता है। Shanti Mantras are found in Upanishads, where they are invoked in the beginning of some topics of Upanishads. They are supposed to calm the mind of reciter and environment around him/her. Reciting them is also believed to be removing any obstacles for the task being started. Shanti Mantras always end with three utterances of word “Shanti” which means “Peace”. The Reason for uttering three times is for….

Read more