Chandrashekhar Vashistha

प्रार्थना

जय श्री चिंतामण इच्छामन सिद्धिविनायक गणपति देव सदा प्रसन्न!! जय माँ हो श्री हरसिद्धि देवी सदा प्रसन्न !! जय माँ श्री पीताम्बरा बग़लामुखी देवी सदा प्रसन्न !! जय श्री महाकाल !! ॐ ब्रह्मानन्द परम सुखदं, केवलं ज्ञानमूर्तिं, द्वन्द्वातीतं गगनसदृशं, तत्त्वमस्यादिलक्ष्यम्। एकं नित्यं विमलमचलं, सर्वधीसाक्षिभूतं, भावातीतं त्रिगुणरहितं, सद्गुरू तं नमामि॥ अखण्डानन्दबोधाय, शिष्यसंतापहारिणे। सच्चिदानन्दरूपाय, तस्मै श्री गुरवे नमः ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुुरुर्विष्णुः, गुरुरेव महेश्वरः। गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः ॥ अखण्डमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम्। तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरवे नमः ॐ आयातु वरदे देवि! त्र्यक्षरे ब्रह्मवादिनि। गायत्रिच्छन्दसां मातः, ब्रह्मयोने नमोऽस्तु ते ॥ ॐ स्तुता मया वरदा वेदमाता, प्रचोदयन्तां पावमानी द्विजानाम्। आयुः….

Read more

वसन्त पञ्चमी : ज्ञान कला प्रेम व तप का त्योहार

वसन्त पञ्चमी : वसंत ऋतु (माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी ) को मनाए जाने वाला पर्व उत्सव है बसंत पंचमी या श्री पंचमी हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती, प्रेम के देवता कामदेव और विष्णु की पूजा की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश, नेपाल , थाईलैंड इंडोनेशिया फ़िजी मारिशस और पूर्व के कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से उत्सव के रूप में मनायी जाती है। इस दिन पीले , बसंती रंग, हल्के केसरिया वस्त्र धारण करते हैं। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक….

Read more

श्रीमन्न महागणपति नमः

श्रीमन्न महागणपति नमः जय श्री चिन्तामण इच्छामन सिद्धिविनायक गणपति देव पवित्र करण ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपिवा ।यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचि ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा ।।1।। ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा ।।2।। ॐ सत्यं यशः श्रीर्मयि श्रीः श्रयतां स्वाहा ।।3।। शिखा बन्धन चिद्रूपिणि महामाये दिव्यतेजः समन्विते ।तिष्ठ देवि शिखा मध्ये तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे ।। प्राणायाम मन्त्र ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम् । ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् । ॐ आपोज्योतीरसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वः ॐ ।। स्वरोम न्यासः ॐ वाङ्म आस्येऽस्तु । से मुख को ।ॐ नसोर्मेप्राणोऽस्तु….

Read more

सनातन धर्म

सनातन धर्म, हिंदू धर्म का प्राचीन   नाम है. इसे वैदिक धर्म भी कहा जाता है. अनेक प्राचीन ग्रन्थ  और इतिहास में इसे ब्राह्मण धर्म के नाम से भी संबोधित किया गया ! सनातन धर्म की कुछ विशेष  बातेंः  सनातन शब्द का मतलब है ‘शाश्वत’ या ‘सदा बना रहने वाला’. इसका मतलब है कि इसका कोई आदि या अंत नहीं है.  सनातन धर्म को दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक माना जाता है. भारत की सिंधु घाटी सभ्यता में इसके कई चिह्न मिले हैं.  सनातन धर्म में सत्य, निष्ठां, इमानदारी, पवित्रता, दया, धैर्य, सहनशीलता, आत्म-संयम, उदारता जैसे गुणों को महत्व दिया जाता….

Read more

संत सुधारक युगदृष्टा ऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की जयंती पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ

व्यक्तित्व चरित्र, योग स्वास्थ्य, वैज्ञानिक आध्यात्मवाद, सनातन संस्कृति, मानव मूल्य आदि विषयो के पुरोधा लेखक, दार्शनिक युगदृष्टा संत सुधारक युगऋषि, वेदमुर्ति तपोनिष्ठ, गुरुदेव् पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने, सनातन ऋषि स्तरीय तपस्या, का अनुशासित जीवन जीते हुए, सर्वोच्च आध्यात्मिक श्रेष्ठता अर्जित की, सम्पूर्ण मानवता को सन्मार्ग में प्रेरित किया, सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रवर्त किया, जिन्होने बदलते समय के अनुसार हमारे दृष्टिकोण को, विचारों को, संवेदनशीलता का विस्तार करने के लिये, जीवन को बदलने के लिये, देवो के लिए ब्रह्मज्ञान के सामान अतुलनीय, 4000 से अधिक सत्साहित्य पूजतको का सृजन किया, वेदों उपनिषदों योग् सूत्र सांख्य दर्शन….

Read more

फ़सलोत्तर प्रबंधन अर्थात् कृषि विपणन का महत्व

फलों और सब्जियों की कटाई के बाद फ़सलोत्तर प्रबंधन , वैल्यू ऐडिशन/प्रसंस्करण का महत्व फलों और सब्जियों की कटाई के बाद की प्रक्रिया कृषि मूल्य श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण कदम है जो कटाई के बाद और उपभोग या आगे वितरण से पहले होती है। इस प्रक्रिया में कई गतिविधियाँ शामिल हैं जिनका उद्देश्य गुणवत्ता को बनाए रखना, शेल्फ़ लाइफ़ को बढ़ाना और काटे गए उत्पाद में मूल्य जोड़ना है। यहाँ कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं कि फलों और सब्जियों की कटाई के बाद की प्रक्रिया क्यों अत्यंत महत्वपूर्ण है: कटाई के बाद की प्रक्रिया से गुणवत्ता का संरक्षण सुनिश्चित होता….

Read more

शुभ अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया  तिथि को कहते हैं। पौराणिक  ग्रन्थों , मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किन्तु वैशाख माह की तृतीया तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्त्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखण्ड, वाहन आदि की खरीददारी से सम्बन्धित कार्य किए जा….

Read more

माता महादेवी सती के 51 शक्तिपीठ

माता महादेवी सती के 51 शक्तिपीठ जहां-जहां  महादेवी सती के अंग, वस्त्र और गहने गिरे वह स्थान बन गये दिव्य शक्तिपीठ सनातन हिंदू धर्म के विशेष  ग्रंथ पुराणों में  माता के दिव्य शक्तिपीठों का वर्णन है। जहां-जहां महादेवी सती के अंग के टुकड़े, वस्त्र और गहने गिरे वहां-वहां मां के दिव्य शक्तिपीठ स्थापित है, ये दिव्य शक्तिपीठ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में मौजूद है। देवी भागवत में 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का उल्लेख है जबकि देवी पुराण में 51 शक्तिपीठ बताए गए हैं। इन 51 दिव्य शक्तिपीठों की संक्षिप्त जानकारी   किरीट शक्तिपीठ– पश्चिम बंगाल के हुगली नदी के तट लालबाग कोट पर स्थित है किरीट शक्तिपीठ, जहां….

Read more

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे महामंत्र है, इस मन्त्र को नवार्ण मंत्र भी कहा जाता है जो देवी भक्तों में सबसे प्रशस्त मंत्र माना गया है। इस मन्त्र के जाप से महासरस्वती, महाकाली तथा महालक्ष्मी माता की कृपा तथा आशीर्वाद प्राप्त होता है। समस्त जगत परब्रह्म की शक्ति है तथा वस्तुतः ब्रह्म की सत् शक्ति के आधार पर भौतिक सृष्टि की प्रतीति हो रही है, चित्त में चेतन जगत् की प्रतीति, आनंद से जगत् में प्रियता की प्रतीति है। इस प्रकार जगत् सत्, चित्, आनंद रूप ही है, भ्रम से अन्य प्रतीत होता है। ॐ – उस परब्रह्म का….

Read more

पत्रकारिता , वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहितः की परंपरा

भारतीय पत्रकारिता की अदभुत परंपरा ने न केवल स्वतंत्रता हेतू सुप्त जनमानस को जगाया, उसे संग्राम हेतु तैयार किया, गढ़ा, प्रेरित किया, इस्तेमाल किया, लक्ष्य भी प्राप्त किया, आज भी पत्रकारिता के संवाहक, वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहितः के ध्येय पर संकल्पित है, व्यक्ति समाज राष्ट्र को जागृत और जीवंत बनाये रखने में प्राण पन जे जुटे है, लगातार समाज श्रेष्ठता की और अग्रसर हो उसकी सुरक्षा हो, मानव अधिकारों की अनुपालना रहे, न्याय के लिए संघर्षरत है, सनातन देवर्षि नारद को इस परंपरा का उदभव माने तो आधुनिक युग से राजाराममोहन राय , राजा शिवप्रसाद, राजा लक्ष्मण सिंह, भारतेंदु हरिश्चंद्र,….

Read more