महाशिवरात्रि महोत्सव पर महाकाल शयन आरती भक्त मंडल का महाप्रसादी रिसेप्शन अदभुत आयोजन

श्री महाकाल शयन आरती भक्त परिवार , महाकाल नियमित दर्शन भक्त मंडल उज्जयिनी व अन्य देश विदेश के महाकाल भक्तों द्वारा महाशिवरात्रि जो कि महादेव का विवाह उत्सव है से अगले प्रदोष शिवरात्रि पर प्रतिवर्ष पुनः विवाह के संस्कार परंपराओं, रस्मो जैसे श्रीगणेश पूजा, षोडश मातृका पूजा, नवग्रह शांति, हल्दी मेहंदी, संगीत, शिव बारात, भूत प्रेत मंडली का नृत्य तथा सबसे अद्भुत रिसेप्शन, सतत प्रसादी महाभोज का आयोजन होता है, जिसमे आम क्या, ख़ास क्या सब बाबा की कृपा प्रसादी प्राप्त करने हेतु टूट पड़ते है, इसकी भव्यता दिव्यता और व्यापकता देखते ही बनती है, जहाँ एक और छोटी मोटी….

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सनातन हिन्दू धर्म मे ये तिथियां अत्यंत शुभ और श्रेष्ठ मानी गयी है

प्रमुख हिन्दू तीज त्योहार महापर्व 1 पौष शुक्ल प्रतिपदा मकर संक्रांति 2 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा नवसंवत्सर , 3 वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया 4 भाद्र पद शुक्ल विनायकी चतुर्थी 5 माघ शुक्ल वसंत पंचमी 6 भाद्र पद कृष्ण अष्टमी जन्माष्टमी 7 चैत्र/अश्विन शुक्ल अष्टमी महाष्टमी 8 चैत्र शुक्ल श्री राम नवमी 9 आश्विन शुक्ल विजया दशमी 10 फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी महाशिवरात्रि 11 कार्तिक कृष्ण धन तेरस 12 कार्तिक अमावस्या ( दीपावली ) 13 श्रावण पूर्णिमा (राखी) 14 फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा ( होली) 🚩🕉️🔱🔔💐

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गेंहू विपणन , निर्यात संभावनाएं एक दृष्टि

­रूस और यूक्रेन   के युद्ध से  गेहूं निर्यात भी प्रभावित हुआ है और ऐसी आशंका है कि आने वाले समय में भी इन देशों से गेहूं की आपूर्ति प्रभावित रहेगा चीन और भारत के बाद रूस ही गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक है । रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं का निर्यातक है. वहीं, यूक्रेन दुनिया में गेहूं का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक है. दुनियाभर में कुल 20 करोड़ टन के गेहूं का निर्यात किया जाता है. कुल निर्यात में रूस और यूक्रेन का हिस्सा करीब पांच से छह करोड़ टन का है. यानी दुनिया में गेहूं के कुल निर्यात का….

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श्री दुर्गा सप्तशती तथा दस महा विद्या के दुर्लभ अद्भुत दिव्य सिद्ध मन्त्र बीज मन्त्र सहीत

श्री गणेशाय नमः ॐ नमश्चण्डिकायै श्री  सिद्ध कुंजिका स्तोत्र मंत्र :- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं स: ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।” ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते। ॐ  ऐं श्रीं नमः   दुर्गे  स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाऽऽर्द्रचित्ता॥4.17॥ ॐ ऐं ह्रीं नमः नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः। नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणता स्मरताम। ॥5.9॥ ॐ ऐं क्रूम  नमः  देव्या हते तत्र महासुरेन्द्रे सेन्द्राः सुरा वह्निपुरोगमास्ताम्। कात्यायनीं तुष्टुवुरिष्टलाभाद् विकाशिवक्त्राब्जविकाशिताशाः॥11.2॥ ॐ  ऐं श्रीं नमः देवि प्रपन्नार्तिहरे….

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शुभ महाशिवरात्रि एवं शिव नवरात्रि महोत्सव 2021

सभी तीर्थों से श्रेष्ठ, ब्रह्मा जी द्वारा निर्मित स्थापित , महाविष्णु की राजधानी , देवताओं ऋषियो गण जनों द्वारा शिव को समर्पित, महाकाल से सुशोभित कालजयी अवंतिका पुरी तीर्थ में, महाशिवनवरात्रि उत्सव प्रारम्भ होने से भक्तों में अपार उत्साह है, जहाँ श्रीगणेश जी , महाकाल स्वरूव भैरव गण , वीरभद्र जी, समस्त देवी – देवता , ऋषि, मुनी, यक्ष, गंधर्व , दैत्य, दानव, भूत प्रेत, गण विभिन्न स्वरूपों में जन्म लेकर, निवास कर, अपने 84 लाख योनियों के फल भोग रहे है, मानव , प्राणी, पशु, पक्षी, पतंग, वृक्ष, पदार्थ या चैतन्य स्वरूप में, उज्जयिनी में किसी न किसी हेतू से….

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दिव्य वेद मंत्रों से प्रकृति के कल्याण, सदभाव और शांति की प्रार्थना

ॐ शान्ति ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदम्पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति ।। ॐ शं नो मित्रः शं वरुणः। शं नो भवत्वर्यमा। शं नः इन्द्रो वृहस्पतिः। शं नो विष्णुरुरुक्रमः। नमो ब्रह्मणे। नमस्ते वायो। त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि। त्वमेव प्रत्यक्षम् ब्रह्म वदिष्यामि। ॠतं वदिष्यामि। सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु। तद्वक्तारमवतु। अवतु माम्। अवतु वक्तारम्। ”ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ ॐ आप्यायन्तु ममांगानि वाक्प्राणश्चक्षुःश्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि। सर्वम् ब्रह्मौपनिषदम् माऽहं ब्रह्मनिराकुर्यां मा मा ब्रह्मनिराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणम् मेऽस्तु। तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्तेमयि सन्तु ते मयि सन्तु। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ ॐ वां मे….

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ब्राह्मी एक दिव्य औषधी

ब्राह्मी (वानस्पतिक नाम : Bacopa monnieri) का एक औषधीय पौधा है जो भूमि पर फैलकर बड़ा होता है। इसके तने और पत्तियाँ मुलामय, गूदेदार और फूल सफेद होते है। यह पौधा नम स्‍थानों में पाया जाता है, तथा मुख्‍यत: भारत ही इसकी उपज भूमि है। इसे भारत वर्ष में विभिन्‍न नामों से जाना जाता है जैसे हिन्‍दी में सफेद चमनी, संस्‍कृत में सौम्‍यलता, मलयालम में वर्ण, नीरब्राम्‍ही, मराठी में घोल, गुजराती में जल ब्राह्मी, जल नेवरी आदि तथा इसका वैज्ञानिक नाम बाकोपा मोनिएरी है। ब्राह्मी वैज्ञानिक वर्गीकरण जगत: पादप अश्रेणीत: एंजियोस्पर्म अश्रेणीत: एकबीजपत्री अश्रेणीत: एस्टरिड्स गण: लामेयालेज़​ कुल: प्लान्टेजिनेसी वंश: en:Bacopa जाति: B. monnieri द्विपद नाम….

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वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः हम पुरोहित राष्ट्र को सदैव जीवंत और जाग्रत बनाए रखेंगे।’

वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः हम पुरोहित राष्ट्र को सदैव जीवंत और जाग्रत बनाए रखेंगे।’ ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः’ यजुर्वेद के नौवें अध्याय की 23वीं कंडिका से लिया गया है। इसका अर्थ है, ‘हम पुरोहित राष्ट्र को सदैव जीवंत और जाग्रत बनाए रखेंगे।’ वाज॑स्ये॒मं प्र॑स॒वः सु॑षु॒वेऽग्रे॒ सोम॒ꣳ राजा॑न॒मोष॑धीष्व॒प्सु। ताऽअ॒स्मभ्यं॒ मधु॑मतीर्भवन्तु व॒यꣳ रा॒ष्ट्रे जा॑गृयाम पु॒रोहि॑ताः॒ स्वाहा॑ ॥२३॥ पद पाठ वाज॑स्यः। इ॒मम्। प्र॒स॒व इति॑ प्रऽस॒वः। सु॒षु॒वे। सु॒सु॒व॒ इति सुसुवे। अग्रे॑। सोम॑म्। राजा॑नम्। ओष॑धीषु। अ॒प्स्वित्य॒प्ऽसु। ताः। अ॒स्मभ्य॑म्। मधु॑मती॒रिति॒ मधु॑ऽमतीः। भ॒व॒न्तु॒। व॒यम्। रा॒ष्ट्रे। जा॒गृ॒या॒म॒। पु॒रोहि॑ता॒ इति॑ पु॒रःऽहि॑ताः। स्वाहा॑ ॥२३॥ शिष्ट मनुष्यों को योग्य है कि सब विद्याओं को चतुराई, रोगरहित और सुन्दर गुणों में शोभायमान….

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शुभ दीपावली श्री महालक्ष्मी पूजा

शुभ दीपावली श्री महालक्ष्मी पूजा ॐ श्री गं गणपतये नमः गणानां त्वा गणपतिं हवामहे प्रियाणां त्वा प्रियपतिं हवामहे निधिनां त्वा निधिपतिं हवामहे वसो मम। अहमजानि गर्भधमा त्वमजासि गर्भधम्।। (यजुर्वेद 23/19) जय श्री महाकाल ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम्। वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं, वन्दे पशूनां पतिम्।। वन्दे सूर्य शशांक वह्नि नयनं, वन्दे मुकुन्दप्रियम्। वन्दे भक्त जनाश्रयं च वरदं, वन्दे शिवंशंकरम्।। स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥ ॐ पयः पृथिव्यां पय औषधीषु पयो दिव्यन्तरिक्षे पयो धाः ।पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम्‌ ॥ विष्णो रराटमसि विष्णोः श्नप्त्रे स्थो विष्णोः स्यूनसि विष्णोर्ध्रुवोऽसि । वैष्णवमसि विष्णवे….

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