Chandrashekhar Vashistha

वेद के मंत्र

पुरुष एव इदं सर्वं यद् भूतं यच्च भव्यम्। उतामृतत्वस्य ईशानो यद् अन्नेन अतिरोहति।। पुरुष, ऋक्. 10.90.2> इस सृष्टि में जो कुछ भी इस समय विद्यमान है, जो अब तक हो चुका है और आगे जो भविष्य में होगा, वह सब पुरुष (परमात्मा) ही है। वह पुरुष उस अमरत्व का भी स्वामी है, जो इस दृश्यमान भौतिक जगत के ऊपर है। आज का विज्ञान भी मानता है कि इस दृश्यमान जगत के अंदर की सच्चाई इसके ऊपर से दिखने वाले रूप से सर्वथा भिन्न है। जो कुछ हमें दिख रहा है वह केवल अन्नमय जगत है अर्थात जगत का वह रूप….

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वेद एवं उपनिषदों के महा मंत्र ज्ञान के अजस्त्र स्त्रोत महासागर

। सं गच्छध्वम् सं वदध्वम्।। (ऋग्वेद 10.181.2) अर्थात: साथ चलें मिलकर बोलें। उसी सनातन मार्ग का अनुसरण करो जिस पर पूर्वज चले हैं। प्रथम श्लोक… श्लोक : ।।ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।। -ऋग्वेद अर्थ : उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे। इस मंत्र या ऋग्वेद के पहले वाक्य का निरंतर ध्यान करते रहने से व्यक्ति की बुद्धि में क्रांतिकारी परिवर्तन आ जाता है। उसका जीवन अचानक ही बदलना शुरू हो जाता है। यदि व्यक्ति किसी भी….

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SAWAMI VIVEKANANAD THE GREATEST SAINT FOREVER !!!

स्वामी विवेकानन्द ( बांग्ला: স্বামী বিবেকানন্দ  जन्म: १२ जनवरी,१८६३ – को कुलीन कायस्थ परिवार में,  ब्रह्मलीन : ४ जुलाई,१९०२ ) विवेकानन्द वेदान्त के विख्यात दार्शनिक, सनातन धर्म के महान विचारक  , प्रभावशाली उपदेशक , युगदृष्टा संत , ब्रह्मज्ञानी आध्यात्मिक गुरु थे। उनका सांसारिक जन्म नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिकास्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की….

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महामृत्युंजय मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र के जप व उपासना के तरीके आवश्यकता के अनुरूप होते हैं। काम्य उपासना के रूप में भी इस मंत्र का जप किया जाता है। जप के लिए अलग-अलग मंत्रों का प्रयोग होता है। मंत्र में दिए अक्षरों की संख्या से इनमें विविधता आती है। यह मंत्र निम्न प्रकार से है- एकाक्षरी (1) मंत्र- ‘हौं’। त्र्यक्षरी (3) मंत्र- ‘ॐ जूं सः’। चतुराक्षरी (4) मंत्र- ‘ॐ वं जूं सः’। नवाक्षरी (9) मंत्र- ‘ॐ जूं सः पालय पालय’। दशाक्षरी (10) मंत्र- ‘ॐ जूं सः मां पालय पालय’। (स्वयं के लिए इस मंत्र का जप इसी तरह होगा जबकि किसी अन्य व्यक्ति….

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आ नो॑ भ॒द्राः क्रत॑वो यन्तु वि॒श्वतः Let noble thoughts come to us from every side Rigveda 1-89-1

आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरीतास उद्भिदः । देवा नोयथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवेदिवे॥ अर्थ – हमारे पास चारों ओर से ऐंसे कल्याणकारी विचार आते रहें जो किसी से न दबें, उन्हें कहीं से बाधित न किया जा सके एवं अज्ञात विषयों को प्रकट करने वाले हों। प्रगति को न रोकने वाले और सदैव रक्षा में तत्पर देवता प्रतिदिन हमारी वृद्धि के लिए तत्पर रहें। मन्त्र-२ देवानां भद्रा सुमतिर्ऋजूयतां देवानां रातिरभि नो नि वर्तताम् । देवानां सख्यमुप सेदिमा वयं देवा न आयुः प्र तिरन्तु जीवसे ॥ अर्थ – यजमान की इच्छा रखनेवाले देवताओं की कल्याणकारिणी श्रेष्ठ बुद्धि सदा….

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ॐ शांति शांति शांति सर्वत्र चहुँ और शांति की प्रार्थना

ॐ ! विश्वानि देव  सवितर्दुरितानि परा  सुव ! यद् भद्रंतन्न आ  सुव* !! ॐ ! हे सकल जगत के उत्पत्तिकर्ता ,  समस्त  ऐश्वर्यो  व  सुखो  के  दाता  सर्वशक्तिमान  सूर्य देव ! आप कृपा करके हमारे समस्त दुर्गुण , दुर्व्यसन , दुर्दिनों  एवम  दुःखो  को दूर  कर दीजिये , और  जो कुछ अच्छा  और  कल्याणकारी  है  वह  हमें प्राप्त  कराइए ! Om. vishvani deva savitar-durtani parasuva. Yad bhadram tanna asuva. Om. O God, the creator of the universe and the Giver of all hapiness. Keep us far from bad habits, bad deeds, and calamities. May we attain everything that is auspicious ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति:, पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति:, सर्वँ….

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शुभ दीपावली

ॐ असतो मा सद्गमय । तमसो मा ज्योतिर्गमय । मृत्योर्मा अमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ ” है परमपिता परमात्मा ईश्वर ॐ हम सभी को असत्य से सत्य की राह दिखाना, हम सभी को अज्ञानता से ज्ञान की और ले जाना, हम सभी को मृत्यु से अमरत्व तक ले चलना| ॐ शांति शांति शांति||” ” Om, Lead us from Unreality (of Transitory Existence) to the Reality (of the Eternal Self), Lead us from the Darkness (of Ignorance) to the Light (of Spiritual Knowledge), Lead us from the Fear of Death to the Knowledge of Immortality. Om Peace, Peace,….

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“निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है” नागरिकों की जीत

सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्य संविधान पीठ ने एकमत लैंडमार्क ऐतिहासिक फैसले में कहा कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मान से जीवन जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पूरे भाग तीन का स्वाभाविक अंग है, सुप्रीम कोर्ट की 9 सदस्य संविधान पीठ ने सरकार की दलील और पूर्व के दोनों निर्णय ख़ारिज करते हुए कहा कि “निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है” और यह सम्मान से जीने के अधिकार अनुच्छेद 21 में सम्मिलित है, जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार एक दूसरे से अलग नहीं किए जा सकते हैं. ये वो अधिकार हैं जो मनुष्य के….

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क्या है आधार, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, होगा 30 जून से आधार अनिवार्य

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया है कि 30 जून से आधार को अनिवार्य कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कोर्ट को बताया कि अलग-अलग समाज कल्याण योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार को अनिवार्य बनाने संबंधी 30 जून की समय सीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ के सामने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि वेलफेयर स्कीम के लिए आधार को अनिवार्य बनाने का मकसद यही है कि इसका लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंचे जो अस्तित्व में ही नहीं हैं, जैसा कि सार्वजनिक….

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तत्वमसि

वेद में कई महावाक्य हैं नेति नेति (यह भी नही, यह भी नहीं) अहं ब्रह्मास्मि (मैं ब्रह्म हूँ) अयम् आत्मा ब्रह्म (यह आत्मा ब्रह्म है) यद् पिण्डे तद् ब्रह्माण्डे (जो पिण्ड में है वही ब्रह्माण्ड में है) वेद की  व्याख्या इन महावाक्यों से होती है। उपनिषद उद्घोष करते हैं कि मनुष्य देह, इंद्रिय और मन का संघटन मात्र नहीं है, बल्कि वह सुख-दुख, जन्म-मरण से परे दिव्यस्वरूप है, आत्मस्वरूप है। आत्मभाव से मनुष्य जगत का द्रष्टा भी है और दृश्य भी। जहां-जहां ईश्वर की सृष्टि का आलोक व विस्तार है, वहीं-वहीं उसकी पहुंच है। वह परमात्मा का अंशीभूत आत्मा है।….

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