Chandrashekhar Vashistha

स्वस्तिक मंत्र या स्वस्ति मन्त्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो। 

पुरातन वैदिक सनातन संस्कृति का परम मंगलकारी प्रतीक चिह्न ‘स्वस्तिक’ अपने आप में विलक्षण है। यह देवताओं की शक्ति और मनुष्य की मंगलमय कामनाएँ इन दोनों के संयुक्त सामर्थ्य का प्रतीक है। स्वस्तिक का अर्थ सामान्यतय: स्वस्तिक शब्द को “सु” एवं “अस्ति” का मिश्रण योग माना जाता है। यहाँ “सु” का अर्थ है- ‘शुभ’ और “अस्ति” का ‘होना’। संस्कृत व्याकरण के अनुसार “सु” एवं “अस्ति” को जब संयुक्त किया जाता है तो जो नया शब्द बनता है- वो है “स्वस्ति” अर्थात “शुभ हो”, “कल्याण हो”। स्वस्ति मंत्र ॐ स्वस्ति न इंद्रो वृद्ध-श्रवा-हा स्वस्ति न-ह पूषा विश्व-वेदा-हा । स्वस्ति न-ह ताक्षर्‌यो अरिष्ट-नेमि-हि स्वस्ति नो बृहस्पति-हि-दधातु ॥ अन्य जानकारी भारतीय….

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भारतीय संसकृति में सर्वाधिक महत्ता है शांति पाठ मन्त्र की

शान्ति मन्त्र वेदों के वे मंत्र हैं जो शान्ति की प्रार्थना करते हैं। प्राय: सनातन  धर्म   हिन्दुओं के  धार्मिक कृत्यों के आरम्भ और अन्त और् महत्व पल  इनका पाठ किया जाता है। Shanti Mantras are found in Upanishads, where they are invoked in the beginning of some topics of Upanishads. They are supposed to calm the mind of reciter and environment around him/her. Reciting them is also believed to be removing any obstacles for the task being started. Shanti Mantras always end with three utterances of word “Shanti” which means “Peace”. The Reason for uttering three times is for….

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न्यायधीशों की नियुक्ति के लिये कालेजियम प्रणाली

सर्वोच्य न्यायालय ने न्यायधीशों की नियुक्ति के लिये पुराने कालेजियम प्रणाली को बहाल कर दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में संविधान के 99वें संशोधन और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इसे निरस्त कर दिया और उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए पुरानी कॉलेजियम प्रणाली को बहाल कर दिया. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर, न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की संविधान पीठ ने एक ‘सामूहिक आदेश’ में कहा कि संविधान का 99वां संशोधन और एनजेएसी अधिनियम….

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श्री राम नवमी महापर्व पर मंगलकामनाए : नौमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता। मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा।।

श्री राम (रामचन्द्र), प्राचीन भारत में अवतरित, सनातन भगवान हैं।  सनातन हिन्दू धर्म में, श्री राम, भगवान् विष्णु के १० अवतारों में से सातवें हैं। श्री राम का जीवनकाल एवं पराक्रम, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित, संस्कृत महाकाव्य रामायण के रूप में लिखा गया है| उन पर तुलसीदास ने भी भक्ति काव्य श्री रामचरितमानस रचा था। खास तौर पर सम्पूर्ण  भारत में श्री राम बहुत अधिक पूजनीय हैं। श्री रामचन्द्र हिन्दुओं के आदर्श पुरुष हैं। श्रीराम, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बडे पुत्र थे। श्रीराम की पत्नी का नाम सीता था (जो लक्ष्मी का अवतार मानी जाती….

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मौन

ताओइज्म, बौद्धिज्म से भी पहले जन्मा। बौद्धिज्म और ताओइज्म के सम्मिलन से, एक नई धारा, नई जीवन पद्धति, नया दृष्टिकोण निकला। ये जीवन पद्धति अपने विचार में बेहद सीधी-सादी थी, जिसने पश्चिम को बहुत प्रभावित किया। पश्चिम के लोग चर्च, कर्म-कांडों आदि से पहले ही ऊबे थे, इसलिए एक सरल-सहज जीवन शैली उन्हें भानी ही थी। चीन और फिर जापान में झेन की विकास यात्रा काफ़ी लंबी रही और उसमें बौद्धिज्म के आयाम जुड़ जाने से वह सहज बोध का बड़ा माध्यम बन पाया।   झेन सूत्र ज्यादातर लोगों के लिए बिल्कुल अटपटा सा, अनसुना सा फ़्रेज़ हो सकता है….

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इच्छा और तृष्णा

यहां तक कि इच्छाहीन होने की इच्छा भी एक इच्छा है। ओशो बताते हैं कि हमें हमारी सुसुप्तावस्था से जागने की आवश्यकता क्यों है। जब आप इच्छाओं से भरे होते हैं तो आपके दुखों में वृद्धि हो जाती है बिल्कुल वैसे ही जैसे बारिश के बाद घास बढ़ जाते हैं, लेकिन अगर आप अपनी इच्छा को अपने वश में कर लेते हैं तो आपके दुख कम हो जायेंगे बिल्कुल वैसे ही जैसे एक कमल के फूल पर पानी की बूंदें होती हैं। यह एक अच्छी सलाह है जो सभी लोगों के लिए है: जैसे नई जड़ों के लिए घास का….

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देवी माँ के सिद्ध 52 शक्तिपीठ

प्रजापति दक्ष की पुत्री के रूप में माता जगदम्बिका ने सती के रूप में जन्म लिया, और भगवान शिव से विवाह किया। दक्ष अपने दामाद शिव को हमेशा निरादर भाव से देखते थे। एक यज्ञ में जब दक्ष ने सती और शिव को न्योता नहीं दिया, फिर भी सती अपने पिता के पास पहुंच गई। इस पर दक्ष ने शिव के विषय में सती के सामने ही अपमान जनक बातें करने लगे। सती को यह सब बर्दाश्त नहीं हुआ और वहीं यज्ञ कूंड में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए। यह खबर सुनते ही शिव ने वीरभद्र को भेजा, जिसने….

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लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती आचार्य सोहन लाल द्विवेदी

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती आचार्य सोहन लाल द्विवेदी नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है मन का विश्वास रगों में साहस भरता है चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती कोशिश करने वालों की हार नहीं होती असफलता एक चुनौती है,….

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गायत्री मंत्र साधना

गायत्री मंत्र    वेद का अत्यंत  महत्त्वपूर्ण मंत्र है जिसकी महत्ता ॐ के लगभग बराबर मानी जाती है। यह यजुर्वेद के मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः और ऋग्वेद के छंद 3.62.10 के मेल से बना है। इस मंत्र में सवित्र देव की उपासना है इसलिए इसे सावित्री भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और इसे समझने से ईश्वर की प्राप्ति होती है। ‘गायत्री’ एक छन्द भी है जो ऋग्वेद के सात प्रसिद्ध छंदों में एक है। इन सात छंदों के नाम हैं- गायत्री, उष्णिक्, अनुष्टुप्, बृहती, विराट, त्रिष्टुप् और जगती। गायत्री छन्द में आठ-आठ….

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जय माँ श्री गढ़कालिका देवी सदा प्रसन्न रहे ॐ एं ह्रीम श्रीम् क्लीं चामुण्डायै विच्च्ये !!

ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्चजगत्यांजग्त् , तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृध: कस्यस्विद्धनम्।। “इस चराचर जगत् में जो कुछ भी विधमान है जड़ चैतन्य वह सब ईश्वर द्वारा आच्छदित है, ईश्वर का ही है, अतः लालच न् करो, त्यागपूर्वक उपभोग करो जय श्री महाकाल

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