पत्रकारिता , वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहितः की परंपरा
भारतीय पत्रकारिता की अदभुत परंपरा ने न केवल स्वतंत्रता हेतू सुप्त जनमानस को जगाया, उसे संग्राम हेतु तैयार किया, गढ़ा, प्रेरित किया, इस्तेमाल किया, लक्ष्य भी प्राप्त किया, आज भी पत्रकारिता के संवाहक, वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहितः के ध्येय पर संकल्पित है, व्यक्ति समाज राष्ट्र को जागृत और जीवंत बनाये रखने में प्राण पन जे जुटे है, लगातार समाज श्रेष्ठता की और अग्रसर हो उसकी सुरक्षा हो, मानव अधिकारों की अनुपालना रहे, न्याय के लिए संघर्षरत है, सनातन देवर्षि नारद को इस परंपरा का उदभव माने तो आधुनिक युग से राजाराममोहन राय , राजा शिवप्रसाद, राजा लक्ष्मण सिंह, भारतेंदु हरिश्चंद्र,….
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