Chandrashekhar Vashistha

वर्ष प्रतिपदा पर भगवा ध्वज लहराए, लोगो ने एक दुसरे को शुभकामनाये दे, सनातन भारतीय नववर्ष का आनंद उत्सव मनाया

नवसंवत्सर वर्ष प्रतिपदा पर भगवा ध्वज लहराए, लोगो ने एक दुसरे को शुभकामनाये दे, सनातन भारतीय नववर्ष का आनंद उत्सव मनाया सनातन काल से शास्त्रों संस्कृति और परंपरा अनुसार भारतीय नववर्ष, नवसंवत्सर का प्रारंभ चेत्र प्रतिपदा जिसे वर्ष प्रतिपदा कहा जाता हे से प्रारंभ  होता हे, इस दिन प्रत्येक घर पर भगवा ध्वज लहराया जा कर शुभकामनाये दी जाती हे उत्सव मनाया जाता हे! चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा को गुड़ी पड़वा या वर्ष प्रतिपदा या उगादि (युगादि) कहा जाता है। इस दिन हिन्दु नववर्ष का आरम्भ होता है। ‘गुड़ी’ का अर्थ ‘विजय पताका’ होता है। कहते हैं शालिवाहन नामक….

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पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य रचित युगनिर्माण सत्संकल्प में सम्पूर्ण सनातन उदेश्यो, मूल्यों आदर्शो का, सरल सहज आचरण पद्धति के, स्वरुप में समावेश हे

व्यक्तित्व चरित्र, योग स्वास्थ्य, वैज्ञानिक आध्यात्मवाद, सनातन संस्कृति, मानव मूल्य आदि विषयो के पुरोधा लेखक, दार्शनिक युगदृष्टा संत सुधारक युगऋषि, वेदमुर्ति तपोनिष्ठ, गुरुदेव् पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने, सनातन ऋषि स्तरीय तपस्या, का अनुशासित जीवन जीते हुए, सर्वोच्च आध्यात्मिक श्रेष्ठता अर्जित की, सम्पूर्ण मानवता को सन्मार्ग में प्रेरित किया, सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रवर्त किया, जिन्होने बदलते समय के अनुसार हमारे दृष्टिकोण को, विचारों को, संवेदनशीलता का विस्तार करने के लिये, जीवन को बदलने के लिये, देवो के लिए ब्रह्मज्ञान के सामान अतुलनीय, 4000 से अधिक सत्साहित्य पूस्तको का सृजन किया, वेदों उपनिषदों योग् सूत्र सांख्य दर्शन….

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सायबर सुरक्षा, रफ़्तार और पहुँच से जुड़े इन्टरनेट इंफ़्रास्ट्रक्चर

भारत में स्मार्टफ़ोन की संख्या 2016 के अंत तक 20 करोड़ पर पहुंचने की संभावना है, कई लोगो के पास दो दो तीन तीन या और अधिक मोबाइल हे. देश में इंटरनेट की स्थिति अत्यंत दयनीय है, यहा इंटरनेट भी देश की 5 प्रतिशत आबादी की पहुंच तक भी नहीं है और सायबर सुरक्षा के प्रबंध तो बिलकूल ही विकसित नहीं हे. ऐसे में स्पष्टतः बड़ी आबादी अब भी इससे दूर है और ज़्यादातर लोग फ़ीचर फ़ोन रखते हैं.  ऐसे लोग इंटरनेट के बिना भी डिजिटल बैंकिंग तक पहुंच सकते हैं।  कोई भी आम आदमी कैशलैस डिजिटल ट्रांसेक्शन के लिए….

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कला विधा वाणी बुद्धि की अधिष्ठात्री वाग्देवी की प्रतिमा को लेकर आंदोलित हैं देशवासी

शुभ वसंतोत्सव महापर्व राजा भोज की आराध्य वाग्देवी की चमत्कारी प्रतिमा, लंदन के म्यूजियम में से धार भोजशाला वापसी की मांग फिर उठने लगी है उज्जैन इलाहाबाद में सिंहस्थ में साधु-सन्यासियों ने भी प्रतिमा वापस लाने के लिए आंदोलन छेड़ने का एेलान किया है। वाग्देवी की प्रतिमा को लेकर आंदोलित हैं देशवासी : ब्रिटिश म्यूजियम, लन्दन, में धारा के खंडहरों से प्राप्त वाग्देवी की एक खंडित प्रतिमा है | प्रतिमा के नीचे अभिलिखित लेख के अनुसार वाग्देवी की यह प्रतिमा राजा भोज की चन्द्रनगरी धारा में सूत्रधार हिरसुत मनथल (मणथल) ने बनाई थी। उस पर यह लेख संवत् 1091 (सन्….

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शुभ गणतंत्र महापर्व, लोकतंत्र और गणतंत्र

गणराज्य  (संस्कृत से ; “गण”: जनता, “राज्य”: रियासत/देश) एक ऐसा देश होता है जहां के शासनतन्त्र में सैद्धान्तिक रूप से देश का सर्वोच्च पद पर आम जनता में से कोई भी व्यक्ति पदासीन हो सकता है, इस तरह के शासनतन्त्र को गणतन्त्र (संस्कृत से ; गण:पूरी जनता, तंत्र:प्रणाली; जनता द्वारा नियंत्रित प्रणाली ) कहा जाता है, “लोकतंत्र” या “प्रजातंत्र” इससे अलग होता है, लोकतन्त्र वो शासनतन्त्र होता है जहाँ वास्तव में सामान्य जनता या उसके बहुमत की इछा से शासन चलता है। आज विश्व के अधिकान्श देश गणराज्य हैं और इसके साथ-साथ लोकतान्त्रिक भी। भारत स्वयः एक लोकतान्त्रिक गणराज्य है….

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ऋग्वेद : मनुर्भ‌व – मनुष्य बनो !

ऋग्वेद : मनुर्भ‌व – मनुष्य बनो ! 1. एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति | (1|164|46) एकेश्‍वर को विद्वान लोग अनेक प्रकार से पुकारते हैं | 2. स्वस्ति पन्थामनुचरेम | (5|51|15) कल्याण मार्ग का अनुसरण करें | 3. विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परासुव | यद् भद्रं तन्न आसुव | (5|85|5) विश्व देव सविता बुराइयां दूर करावें जो कल्याणकारी है, वह प्रदान करें | 4. उप सर्प मातरं भूमिम् | (10|18|10) मातृ भूमि की सेवा करें | 5. सं गच्छध्वम् सं वदध्वम् | (10|181|2) सब साथ चलें सब साथ मिलकर बोलें | यजुर्वेद : सुमना भव | अच्छे मन वाले बनें ! 6…..

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“तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु” हम सबका मन सदैव शुभ और कल्याणकारी संकल्पों से युक्त हो

यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति। दूरंगमं ज्योतिषां ज्योतिरेकं तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥१॥ अर्थ: जो मन जागते हुए मनुष्य से बहुत दूर तक चला जाता है, वही द्युतिमान् मन सुषुप्ति अवस्था में सोते हुए मनुष्य के समीप आकर लीन हो जाता है तथा जो दूरतक जाने वाला और जो प्रकाशमान श्रोत आदि इन्द्रियों को ज्योति देने वाला है, हम सबका मन सदैव शुभ और कल्याणकारी संकल्पों से युक्त हो ! येन कर्माण्यपसो मनीषिणो यज्ञे कृण्वन्ति विदथेषु धीराः। यदपूर्वं यक्षमन्तः प्रजानां तन्मे मनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥२॥ अर्थ: कर्म अनुष्ठान में तत्पर बुद्धि संपन्न मेधावी पुरुष यज्ञ में जिस मन से शुभ कर्मों को करते….

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ॐ ईशावास्यमिदँ सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥

॥अथ ईशोपनिषत्॥ ॐ ईशावास्यमिदँ सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥१॥ प्रथम मन्त्र में ही जीवन और जगत को ईश्वर का आवास कहा गया है। ‘यह किसका धन है?’ प्रश्न द्वारा ऋषि ने मनुष्य को सभी सम्पदाओं के अहंकार का त्याग करने का सूत्र दिया है। इससे आगे लम्बी आयु, बन्धनमुक्त कर्म, अनुशासन और शरीर के नश्वर होने का बोध कराया गया है। यहाँ जो कुछ है, परमात्मा का है, यहाँ जो कुछ भी है, सब ईश्वर का है। हमारा यहाँ कुछ नहीं है,यहाँ इस जगत में सौ वर्ष तक कर्म करते हुए जीने की इच्छा करनी….

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धारा 370 जम्मू कश्मीर पहले से भारत का अभिन्न अंग,विलय अन्य रियासतों के समान अंतिम

“धारा 370 जम्मू कश्मीर पहले से भारत का अभिन्न अंग,विलय अन्य रियासतों के समान अंतिम” “धारा 370” क्या हे :- भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसके द्वारा जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी,….

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छत्रपति शिवाजी महाराज का हिन्दू स्वराज्य और सुशासन मंत्र

ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी को शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक समारोह रायगढ़ किले पर संपन्न हुआ | तारिख थी 6 जून 1674 | इस घटना को 340 साल हो रहे हैं | शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक एक युगपरिवर्तनकारी घटना थी | महाराजा पृथ्वीराज सिंह चौहान के बाद भारत से हिंदू शासन लगभग समाप्त हो चुका था | दिल्ली में मुगलों की सल्तनत थी, और दक्षिण में आदिलशाही, कुतुबशाही आदि मुस्लिम राजा राज्य कर रहे थे | सभी जगह इनके सरदार-सेनापति हिन्दू ही रहा करते थे। मतलब यह हुआ कि, हिन्दू सेनाप्रमुखों ने ही हिन्दुओं को गुलाम किया और उन पर विदेशी मुसलमानों….

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