Chandrashekhar Vashistha

क्रांति शिरोमणि पण्डित चन्द्रशेखर ‘आजाद’ प्रखर देशभक्त

क्रांति शिरोमणि पण्डित चन्द्रशेखर ‘आजाद’ (२३ जुलाई १९०६ से २७ फरवरी १९३१) उपनाम : ‘आजाद’, ’पण्डित जी’, ’बलराज’  व  ‘Quick Silver’ जन्मस्थल : भाँवरा गाँव (वर्तमान अलीराजपुर जिला) मृत्युस्थल: अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश आन्दोलन: भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम प्रमुख संगठन: हिदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन सेना के मुख्य  सेनापति (१९२८) पण्डित चन्द्रशेखर ‘आजाद‘ (२३ जुलाई, १९०६ – २७ फरवरी, १९३१) ऐतिहासिक दृष्टि से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अत्यन्त सम्मानित और लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे। वे पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व सरदार भगत सिंह सरीखे महान क्रान्तिकारियों के अनन्यतम साथियों में से थे। सन् १९२२ में गाँधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन को अचानक बन्द….

Read more

रंगों का त्यौहार होली भारत का अत्यंत प्राचीन पर्व है जो होली, होलिका या होलाका नाम से मनाया जाता हें, वसंत की ऋतु में हर्षोल्लास के साथ मनाए जाने के कारण इसे वसंतोत्सव और काम-महोत्सव भी कहा गया है

होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्योहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रंगों का त्योहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता हैं ! यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहां भी धूम धाम के साथ मनाया जाता हैं! पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है। दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता….

Read more

संस्कृत और भारतीयो के महत्त्व के गर्व पूर्ण रोचक तथ्य

संस्कृत भाषा के बारे में रोचक तथ्य ,किसी मंदिर या गुरुकुल के पास से गुजरते हुए आपने संस्कृत के श्लोक या मंत्र तो अवश्य ही सुने होंगे. इन मन्त्रों और श्लोकों से बचपन में ही हमारा रिश्ता टूट चुका है पर फिर भी आज ये श्लोक कभी-कभी सुनाई दे ही जाते हैं. संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है लेकिन वर्तमान में विलुप्त होने की कगार पर है.. 2001 में संस्कृत बोलने वाले लोगो की संख्या सिर्फ14135 थी। दुनिया जहाँ संस्कृत की महिमा समझकर संस्कृत सीखना चाह रही है स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटीज के पाठ्यक्रम में संस्कृत को जोड़ा जा रहा….

Read more

समस्त ऐश्वर्यों की अधिष्ठात्री और अपार धन सम्पत्तियों को देने वाली महालक्ष्मी की आराधना

समस्त ऐश्वर्यों की अधिष्ठात्री और अपार धन सम्पत्तियों को देने वाली महालक्ष्मी की आराधना हर दिन करनी चाहिए। महालक्ष्मी के पाठ अत्यंत फलदायक है। समस्त ऐश्वर्यों की अधिष्ठात्री और अपार धन सम्पत्तियों को देने वाली महालक्ष्मी की आराधना हर दिन करनी चाहिए। महालक्ष्मी की कृपा सेे वैभव, सौभाग्य, आरोग्य, ऐश्वर्य, शील, विद्या, विनय, ओज, गाम्भीर्य और कान्ति मिलती है। आश्चर्यजनक रूप से असीम संपदा मिलती है। प्रस्तुत है इन्द्र द्वारा रचित महालक्ष्मी कृपा प्रार्थना स्तोत्र…जिसमें श्री महालक्ष्मी की अत्यंत सुंदर उपासना की गई है। एक बार देवराज इन्द्र ऐरावत हाथी पर चढ़कर जा रहे थे। रास्ते में दुर्वासा मुनि मिले।….

Read more

सनातन धर्म के संस्कार हिन्दू धर्म आधारीत रीति-रिवाज़ है जिसमें जन्म के पूर्व से लेकर मृत्यु के बाद तक के विभिन्न संस्कारो के विधि-विधान का समावेश है

सनातन धर्म के संस्कार हिन्दू धर्म आधारीत रीति-रिवाज़ है जिसमें जन्म से लेकर मृत्यु के बाद के विभिन्न संस्कारो के विधि-विधान का समावेश होता है। विवाह, जनेउ इत्यादि संस्कार बडे धामधूम से मनाये जाते है। वर्तमान समय में सनातन धर्म या हिन्दू धर्म के अनुयायी गर्भधान से मृत्यु तक १६ संस्कारो में से पसार होते है। हिन्दू संस्कार का इतिहास प्राचीन काल में प्रत्येक कार्य संस्कार से आरम्भ होता था। उस समय संस्कारों की संख्या भी लगभग चालीस थी। जैसे-जैसे समय बदलता गया तथा व्यस्तता बढती गई तो कुछ संस्कार स्वत: विलुप्त हो गये। इस प्रकार समयानुसार संशोधित होकर संस्कारों….

Read more

स्वस्तिवाचन अर्थात मंगलकामनाये से प्रारंभ होते हे सनातन धर्म के अनुष्ठान

 ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः, गुरुरेव महेश्वरः। गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ अखण्डमंडलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम्। तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय। ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥ गायत्री महामंत्र वेद ॐ भूर्भुव स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे। आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरितासउद्भिदः। देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥ दवानां भद्रा सुमतिर्ऋजूयतां देवाना ग्वँग् रातिरभि नो निवर्तताम्। देवाना ग्वँग्….

Read more

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌। हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌ वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌ !! शुभ वसंतोत्सव महापर्व

राजा भोज की आराध्य वाग्देवी की चमत्कारी प्रतिमा, लंदन के म्यूजियम में धार भोजशाला की वाग्देवी (सरस्वती) प्रतिमा को लंदन से वापसी की मांग फिर उठने लगी है। उज्जैन इलाहाबाद में साधु-सन्यासियों ने भी प्रतिमा वापस लाने के लिए आंदोलन छेड़ने का एेलान किया है। वाग्देवी की प्रतिमा को लेकर आंदोलित हैं देशवासी ब्रिटिश म्यूजियम, लन्दन, में धारा के खंडहरों से प्राप्त वाग्देवी की एक खंडित प्रतिमा है | प्रतिमा के नीचे अभिलिखित लेख के अनुसार वाग्देवी की यह प्रतिमा राजा भोज की चन्द्रनगरी धारा में सूत्रधार हिरसुत मनथल (मणथल) ने बनाई थी। उस पर यह लेख संवत् 1091 (सन्….

Read more

हम करे राष्ट्र आराधन

राष्ट्रगान देश प्रेम से परिपूर्ण एक ऐसी संगीत रचना है, जो उस देश के इतिहास, सभ्यता, संस्कृति और उसके नागरिको के मूल्यों आदर्शो के तथा जीवन संघर्ष की व्याख्या करती है। यह संगीत रचना या तो उस देश की सरकार द्वारा स्वीकृत होती है या परंपरागत रूप से प्राप्त होती है। भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ है, जो मूलतः बांग्ला भाषा में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर द्वारा लिखा गया था, जिसे संविधान सभा व भारत सरकार द्वारा 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रगान के रूप में अंगीकृत किया गया। इसे सर्वप्रथम 27 दिसम्बर 1911 को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन दोनों भाषाओं….

Read more

वेद विश्व के प्राचीनतम साहित्य हैं,सनातन हिन्दुओं के आधारभूत धर्मग्रन्थ, जिन्हें ईश्वर की वाणी माना जाता है,जिनके मन्त्र आज भी प्रासंगिक

वेद विश्व के प्राचीनतम 200 करोड़ वर्ष से हैं,सनातन हिन्दुओं के आधारभूत धर्मग्रन्थ, जिन्हें ईश्वर की वाणी माना जाता है,जिनके मन्त्र आज भी प्रासंगिक तथा उपयोगी हे. वेदों को सनातन धर्म का आधार माना जाता है। यह शब्द संस्कृत भाषा के “विद्” धातु से बना है। इन्हें हिंदू धर्म का सबसे पवित्र धर्म ग्रंथ माना गया है। इनसे वैदिक संस्कृति प्रचलित हुई है। ऐसी मान्यता है कि इनके मंत्रों को परमेश्वर यानी भगवान ने प्राचीन ऋषियों को सुनाया था। इसलिए वेदों को श्रुति भी कहा जाता है। वेद प्राचीन भारत के वैदिक काल की वाचिक परंपरा की सबसे अच्छी रचना….

Read more

“चरैवेति चरैवेति”

“चरैवेति चरैवेति” ऐतरेय ब्राह्मण 1: कठोर परिश्रम करने वाले व्यक्ति को ही भांति-भांति की श्री यानी वैभव/संपदा प्राप्त होती हैं , एक ही स्थान पर निष्क्रिय बैठे रहने वाले विद्वान व्यक्ति तक को लोग तुच्छ मानते हैं । विचरण में लगे जन का इन्द्र यानी ईश्वर साथी होता है । अतः तुम चलते ही रहो (विचरण ही करते रहो, चर एव) । ‘श्री’ से यहां मतलब केवल भौतिक संपदा से नहीं है बल्कि स्थान-स्थान पर विचरण करने से प्राप्त ज्ञान, भांति-भांति के लोगों से प्राप्य अनुभव, उनसे सीखे गए कर्म-संपादन का कौशल, आदि हे । इंद्र बताना चाहते हैं कि….

Read more