Chandrashekhar Vashistha

सं गच्छध्वं सं वद्ध्वं सं वो मनांसि जानताम् । देव भागं यथापूर्वे संजानाना उपासते ।। ऋग्वेद 10/191/2

जैसे पूर्ववर्ती व्यवहारकुशल ज्ञानीजन पारस्परिक अविरोधपूर्वक कार्य करते आये है, उसी प्रकार हम सब मिलकर चले, समान भाव से बोले, आप सब विद्द्वानो के मन एक समान श्रेष्ठ हो ।

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हिंदु, वो व्यक्ति है जो भारत को अपनी पितृभूमि और अपनी पुण्यभूमि दोनो मानता है

हिन्दुत्व हिन्दू धर्म के अनुयायियों को एक और अकेले राष्ट्र में देखने की अवधारणा है । हिन्दुत्ववादियों के अनुसार हिन्दुत्व कोई उपासना पद्धति नहीं, बल्कि हिन्दू लोगों द्वारा बना एक राष्ट्र, एक संस्कृति है । वीर सावरकर ने हिन्दुत्व और हिन्दूशब्दों की एक परिभाषा दी थी जो हिन्दुत्ववादियों के लिये बहुत महत्त्वपूर्ण है | उन्होंने कहा कि हिन्दू वो व्यक्ति है जो भारत को अपनी पितृभूमि और अपनी पुण्यभूमि दोनो मानता है । हिन्दू धर्म को सनातन, वैदिक या आर्य धर्म भी कहते हैं। हिन्दू एक अप्रभंश शब्द है। हिंदुत्व या हिंदू धर्म को प्राचीनकाल में सनातन धर्म कहा जाता था।….

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महान ऋषियों शाष्त्रो ने युगों युगों पूर्व पृथ्वीपुत्र युद्धदेव लाल ग्रह अंगारक मंगल की व्याख्या स्पस्ट की

हमारे महान ऋषियों शाष्त्रो ने युगों युगों पूर्व जिसे पृथ्वीपुत्र युद्धदेव लाल ग्रह अंगारक मंगल उल्लेखित कर जिन गुणों की व्याख्या की उसे ही आज के अत्याधुनिक विज्ञान ने सत्य प्रमाणित किया, पूण्य स्मरण वंदन सनातन वैज्ञानिक सिदांत प्रतिपादक आविष्कारक : आर्यभट्ट, वराहमिहिर, भास्कराचार्य, नागार्जुन, कणाद, धन्वन्तरी, चरक , शुश्रुत , बोधायन, कोमार भृत्य जीवक, वाग्भट , ब्रह्मगुप्त, हलायुध ! प्राचीन भारत के गौरवशाली वैज्ञानिक अभियान परंपरा की महान विजय श्रुंखला पर मंगलकामनाए, अभिनंदन इसरो, अभिनंदन आधुनिक भारत के वैज्ञानिक अनिल काकोडकर,बीरबल साहनी, होमी जहाँगीर भाभा, कैलाशनाथ कौल, वनस्पतिशास्त्री। World authority on palms, श्रीराम शंकर अभयंकर – गणितज्ञ। singularity theory….

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भगवान् परशुराम

परशुराम राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुकाऔर भृगुवंशीय जमदग्नि के पुत्र, विष्णु के अवतार और शिव के परम भक्त थे। इन्हें शिव से विशेष परशु प्राप्त हुआ था। इनका नाम तो राम था, किन्तु शंकर द्वारा प्रदत्त अमोघ परशु को सदैव धारण किये रहने के कारण ये परशुराम कहलाते थे। विष्णु के दस अवतारों में से छठा अवतार,जोवामन एवं रामचन्द्र के मध्य में गिने जाता है। जमदग्नि के पुत्र होने के कारणये ‘जामदग्न्य’ भीकहे जाते हैं। इनकाजन्म अक्षय तृतीया , (वैशाखशुक्ल तृतीया ) कोहुआ था।अत: इस दिन व्रत करने और उत्सव मनाने कीप्रथा है। परम्परा के अनुसारइन्होंने क्षत्रियों काअनेक बारविनाश किया।….

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जय श्री चिन्तामण इच्छामन सिद्धिविनायक गणपति देव

प्रारंभी विनती करू गणपति विद्यादयासागरा | अज्ञानत्व हरूनि बुद्धीमति दे आराध्य मोरेश्र्वरा || चिंता,क्लेश,दारिद्रय,दुःख हरूनि देशांतरा पाठवी| हेरंबा,गणनायका,गजमुखा भक्ताबहुतोषवी! वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि संप्रभ निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येशु सर्वदा ! शुक्लाम्बरधरं देवं | शशिवर्ण चतुर्भुजम | प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्व | विघ्नोंपशान्तये || गणानामधिपश्चंडो | गजवक्त्रास्त्रिलोचन: | प्रसन्नो भव मे नित्यं | वारदातर्विनायक || अभीप्सितार्थ सिध्यर्थं पूजितो यः सुरैरपि , सर्व विघ्नच्चिदे तस्मै गणाधिपतये नमः ! खर्वस्थूलतनुं गजेन्द्रवदनं लम्बोदरंसुन्दरंप्रस्यन्दन्मदगन्धलुब्धमधुपव्यालोलगण्डस्थलम दंताघातविदारितारिरूधिरैः सिन्दूरशोभाकरं वन्दे शलसुतासुतं गणपतिं सिद्धिप्रदं कामदम् || एकदंत चतुर्हस्तं पाशामंकुशधारिणम्।रदं च वरदं च हस्तै र्विभ्राणं मूषक ध्वजम्।। रक्तं लम्बोदरं शूर्पकर्णकं रक्तवाससम्। रक्त गंधाऽनुलिप्तागं रक्तपुष्पै सुपूजितम्।! गजानन भूत गणाधि सेवतिं, कपित्थ जम्बूफल….

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भगवा ध्वज प्राचीन भारत,शाश्वत सनातन हिन्दू संस्कृति एवं धर्म का प्रतीक है

सनातन हिन्दू मान्यता हे कि चेत्र शुक्ल प्रतिपदा पर सृष्टि का प्रारंभ हुआ था अतः सभी भारतीयों द्वारा इस दिन शुभ नवसंवतसर का प्रारंभ माना जाकर, नववर्ष पर भगवा ध्वज का पूजन कर घट स्थापना कर माँ शक्ति की उपासना का 9 दिवसीय शुभ नवरात्र महापर्व मनाया जाता हे . भगवा ध्वज प्राचीन भारत,शाश्वत सनातन हिन्दू संस्कृति एवं धर्म का प्रतीक है,यह हिन्दू धर्म के प्रत्येक पवित्र स्थान मन्दिर, मठ, आश्रम,पर फहराया जाता है। यह हिन्दुओं के महान प्रतीकों में से प्रमुख है। इसका रंग भगवा (saffron) केसरिया होता है। यह त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता एवं सेवा का प्रतीक है।….

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भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे तिरंगा की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है, बीच की पट्टी का श्वेत धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतीक है, निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है, सफ़ेद पट्टी पर बने चक्र को धर्म चक्र कहते हैं, इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है, इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गति‍शील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है

भारत के राष्ट्रीय ध्वज जिसे तिरंगा भी कहते हैं, तीन रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र द्वारा सुशोभित ध्वज है। इसकी अभिकल्पना पिंगली वैंकैया ने की थी। इसे 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व 22 जुलाई, 1947 को आयोजित भारतीय संविधान-सभा की बैठक में अपनाया गया था। इसमें तीन समान चौड़ाई की क्षैतिज पट्टियाँ हैं, जिनमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में श्वेत ओर नीचे गहरे हरे रंग की पट्टी है। ध्वज की लम्बाई एवं चौड़ाई का अनुपात 2:3 है। सफेद पट्टी के मध्य में गहरे नीले रंग….

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उज्जैन के महात्मय के अनुरूप हे ये नाम उज्जयिनी, अवन्तिका, प्रतिकल्पा, कनकश्रृंगा, कुशस्‍थली, पद्मावती, कुमुद्वती, अमरावती, विशाला, अम्बिका, हिरण्यवती, भोगवती, नवतेरी नगर, शिवपुरी

प्राचीन भारत के प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक केंद्रों में उज्जयिनी का विशिष्ट स्थान था। इसी कारण इस नगरी ने विभिन्न कालों में विभिन्न नामों को धारण किया। प्राय: प्राचीन संस्कृति के केंद्रभूत नगरों के 2 से अधिक नाम नहीं मिलते, परंतु महाकाल की पुण्यभूमि उज्जयिनी एक दिव्य भूमि होने से अपनी भिभिन्न विशेषताओ के कारन भिन्न भिन्न काल में विशेष नमो से शुशोभीत रही .अपने विभिन्न विशेषताओ के कारण पाए नाम के कारण युगों युगों से विश्व के इतिहास में एक अनूठी विशेषता रखती है। उज्जयिनी के विभिन्न नामों में प्रमुख नाम ये हैं- कनकश्रृंगा, कुशस्‍थली, अवन्तिका, पद्मावती, कुमुद्वती, प्रतिकल्पा,….

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राष्ट्र संत स्वामी विवेकानंद की 152 वीं जयंती, भारत में उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है.

स्वामी विवेकानंद की 152 वीं जयंती, भारत में उनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है. विवेकानंद का निधन महज़ 39 साल की उम्र में हो गया था. युवाओं को संबोधित करते उनके संदेश ख़ासे मशहूर व् प्रेरक रहे हैं,  स्वामी विवेकानंद के ऐसे ही कुछ संदेश 1. उठो. जागो. और तब तक मत रुको जब तक तुम्हें तुम्हारे लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए. 2. कोई एक ध्येय (विचार) बना लो और उस विचार को अपनी ज़िंदगी बना लो. उस विचार को बार-बार सोचो, उसके सपने देखो और उसे जियो. दिमाग, मांसपेशियां, नसें और शरीर….

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गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः, गुरूर साक्षात परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः !!

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् , तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥ ब्रह्मानन्दम परमसुखदं केवलं ज्ञानमूर्तिम , द्व्न्दातीतं गगनसद्र्षम तत्वमस्यादीलक्ष्यं , एकं नित्यं विमलमचलम सर्वदीसाक्षीभूतं , भावातीतं त्रिगुणरहितं सद्गुरुं त्वं नमामि !! अखंडानंद बोधाय शिष्य संताप हारिणे, सच्चिदानंद रूपाय तस्मये श्री गुरुव्य़े नमः ।।

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